अगर हर कोई वीगन बन जाए तो क्या होगा?

यह एक प्रश्न है जिसके दो संभावित अर्थ हैं: पहला, अगर हर कोई रातों-रात में ही वीगन बन जाए तो क्या होगा? और दूसरा अर्थ, अगर वीगन लोगों की संख्या लगातार बढ़ती रहे जब तक कि धरती पर हर कोई वीगन न बन जाए तो क्या होगा?”

यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहला अर्थ असंभव है और दूसरा अर्थ हम सबका एक लक्ष्य है— हालाँकि यह एक महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य है—जिसकी ओर हमें बढ़ना चाहिए।

जब लोग पूछते हैं, ‘अगर हर कोई वीगन बन जाए तो क्या होगा?’ तो वे कल्पना करते हैं कि मांस के लिए पाले गए  पशुओं को जंगल में छोड़ दिया जाएगा ताकि वे खुद का भरण-पोषण कर सकें अन्यथा वे विलुप्त हो जाएंगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि लोग इस बात के बारे में चिंतित हैं!”

लेकिन इस अनिश्चित दुनिया में, एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट है – कि पूरी दुनिया के सभी लोग कल तक वीगन नहीं बन जाएँगे, इसिलए हम इस संभावना को छोड़ देते हैं और अधिक पूरी होने वाली संभावना पर ध्यान देते हैं: कि आने वाले वर्षों में वीगन, शाकाहारी, फ्लेक्सिटेरियन और रिड्यूसिटेरियन की संख्या बढ़ती जाएगी।

अगर हम उस बिंदु पर पहुँच जाते हैं जहाँ हर व्यक्ति वीगन बन जाता है, तो हमारी दुनिया कुछ इस तरह दिखेगी…

दुख-पीड़ा काफी हद तक कम हो जाएगी।

जानवरों को पीड़ा देने वाले और उनका शोषण करने वाले पशुपालन उद्योग और बूचड़खाने बंद हो जाएंगे। हमारे भोजन को उगाया, काटा और छांटा जाएगा, न कि निर्दयता से मारा जाएगा। अंडा उद्योग द्वारा लाखों नर चूज़ों को गैस से जलाकर मारा नहीं जाएगा या ज़िंदा ही उन्हें मिक्सर में पीसा नहीं जाएगा। डेयरी उद्योग द्वारा नर बछड़ों को मारा नहीं जाएगा जो वर्तमान दुनिया में होता है, क्योंकि नर बछड़े दूध नहीं दे सकते।

ये नई दुनिया हम जैसे लोगों के लिए बहुत खूबसूरत होगी जो अन्य प्राणियों के शोषण और दमन से नफरत करते हैं। हम जैसे लोगों के लिए यह नई दुनिया निश्चित रूप से अधिक दयालु और सहानुभूतिपूर्ण होगी।

जंगली जानवरों का घर बचा रहेगा।

और यह नई दुनिया केवल पशुपालन उद्योग के पशुओं के लिए ही अच्छी नहीं होगी; बल्कि जंगली जानवर भी सुरक्षित रहेंगे।। क्योंकि पशुपालन उद्योग के कारण लगातार वनों की कटाई हो रही है जिससे जंगली जानवरों के आवास नष्ट हो रहे हैं और जंगली जानवरों की जनसंख्या कम होती जा रही है

ऐसा इसीलिए है क्योंकि मांस उत्पादन संसाधनों का भारी उपयोग करता है। पौधों पर आधारित भोजन प्रणाली के मुकाबले मांस-उत्पादन की भोजन प्रणाली में बहुत अधिक पानी, ऊर्जा और भूमि की आवश्यकता होती है। अगर हम सभी पौधों पर आधारित भोजन खाएँ तो हमारे संसाधन इस तरह व्यर्थ बर्बाद नहीं होंगे। दुनियाभर के लोगों की मांस की मांग को बनाए रखने के लिए, जंगलों और अन्य प्राचीन आवासों को नष्ट कर दिया जाता है ताकि उस ज़मीन को चराई के लिए या पशुपालन उद्योग के पशुओं के लिए चारा उगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

जब जंगलों और अन्य प्राचीन आवासों का विनाश होना बंद हो जाएगा तब जंगली स्थानों को फिर से जंगली बनने का अवसर मिलेगा। हम विलुप्त प्रजातियों को तो वापस नहीं ला सकते, लेकिन हम अभी भी उन प्रजातियों को बचा सकते हैं जो हमारे साथ इस धरती पर रहती हैं। जंगली जानवरों को खुलकर जीवन जीने का मौक़ा मिलेगा और वे अपने बच्चों को भी पाल पाएँगे, बिना इस डर के कि एक दिन उनके घर को बुलडोज़र से नष्ट किया जा सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग धीमी हो जाएगी

पशुपालन उद्योग जलवायु परिवर्तन करने वाली गैसों के मुख्य उत्सर्जकों में से एक है। क्योंकि मांस और डेयरी उत्पादन में बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, जब दुनिया का हर व्यक्ति वीगन बन जाएगा तब हम वातावरण के तापमान को बढ़ने से रोक पाएंगे और वैश्विक तापमान की वृद्धि को विनाशकारी 1.5 डिग्री के स्तर से नीचे रख पाएंगे।

अगर हम ऐसा कर पाते हैं, तो हम अधिक प्रजातियों को बचा सकेंगे, और ज़्यादा प्राकृतिक स्थानों की रक्षा कर पाएंगे। इससे अनगिनत इंसानों की जान बचेगी, और विनाशकारी मौसम की घटनाओं से विस्थापित होने वाले शरणार्थियों की संख्या कम होगी। जीवन हम सभी के लिए अधिक दयालु और सुखद हो जाएगा।

वीगन दुनिया में प्रदूषण कम होगा

एक वीगन दुनिया में, प्रदूषण कम होगा क्योंकि औद्योगिक पशुपालन उद्योग नहीं होंगे, जो मल-मूत्र को जलमार्गों में बहाकर जलीय जीवन को नष्ट करते हैं और महासागरों में मृत क्षेत्र (जहाँ कोई जीवन नहीं हो सकता) बनाते हैं। पशुपालन उद्योग न केवल वायु प्रदूषण, बल्कि पानी और मिट्टी का भी प्रदूषण करते हैं, इसीलिए, जो लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, वे भी साफ हवा में साँस ले सकेंगे।

मनुष्य अधिक स्वस्थ होंगे

एक वीगन दुनिया में, हमें एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (दवाओं के प्रति रोगाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता) पर काबू पाने का मौका मिलेगा। आजकल, पशुपालन उद्योगों के पशुओं को बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं ताकि उन्हें कुछ हफ्तों या महीनों तक जीवित रखा जा सके, जब तक कि उनका वध नहीं किया जाता। एंटीबायोटिक्स का इतना व्यापक उपयोग सुपरबग्स (ऐसे बैक्टीरिया जो दवाओं के असर से बच जाते हैं) के उभरने का कारण बनता है, और यह हमें उस पुराने समय की ओर वापस ले जा सकता है जब लोग साधारण संक्रमणों से मर जाते थे।

बिना बूचड़खानों के, हम दूसरे लोगों से ऐसा काम करने के लिए नहीं कहेंगे, जिसे करने के लिए हम खुद तैयार नहीं हैं। यह काम करने से उनमें पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) और पर्पिट्रेशन-इंड्यूज़ड स्ट्रेस डिसऑर्डर (PISD) जैसे मानसिक विकारों का खतरा बढ़ता है। शोध से पता चलता है कि जहाँ बूचड़खाने खुलते हैं, वहाँ हिंसा बढ़ जाती है, और पशुओं को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों और इंसानों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के बीच के मनोवैज्ञानिक संबंधों की लगातार जाँच की जा रही है।

वीगन दुनिया में हम और अधिक स्वस्थ होंगे। वीगन लोगों को हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी दुनिया की सबसे घातक बीमारियों का खतरा कम होता है। शोध से पता चलता है कि शाकाहारी लोग मांसाहारियों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं, और वीगन लोग उनसे भी अधिक जी सकते हैं।

अगर हर कोई वीगन बन जाए, तो पशुपालन उद्योग के पशुओं की प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं?

यह संभव है कि कुछ खास उद्देश्यों से पाली गई पशुओं की नस्लों को फ़िर पाला नहीं जाएगा। जैसे वे अरबों मुर्गियाँ जिनका वज़न इतना बढ़ा दिया जाता है कि उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं और उन्हें हृदय रोग हो जाता है, अच्छा होगा कि ऐसी मुर्गियों का अस्तित्व समाप्त हो जाए। अच्छा ही होगा कि मनुष्यों को सस्ता मांस खिलाने के लिए इन मासूम पशुओं का शोषण नहीं किया जाएगा। वास्तव में, ये नस्लें पूरी तरह से खत्म नहीं होंगी, क्योंकि कुछ पशुओं को घरों और आश्रयों (सैंक्चुअरी) में संरक्षण दिया जाएगा और उनकी देखभाल की जाएगी।। और निश्चित रूप से, इनके जंगली रिश्तेदार अब भी जंगलों में मौजूद रहेंगे।

हमें यह याद रखना चाहिए कि मांस के लिए पशुओं को बढ़ा करके, हम अनगिनत जंगली प्रजातियों को विलुप्ति की ओर धकेल रहे हैं। यदि प्रजातियों का संरक्षण करना वास्तव में हमारी प्राथमिकता है, तो हम सबके लिए वीगन बनना ही समझदारी होगी।

एक वीगन दुनिया वह है जो लोगों, पशुओं और पृथ्वी को लाभ पहुंचाती है। यहाँ हमारी

केट फाउलर हमारी संचार निदेशक हैं। केट लगभग 30 वर्षों से वीगन हैं। उन्होंने कई मीडिया और राजनीतिक अभियानों पर काम किया है, जिसमें वध के दौरान पशुपालन उद्योगों के पशुओं की पीड़ा को उजागर करना भी शामिल है।

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